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Abhyasvan Bhav Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 8 उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः

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Abhyasvan Bhav Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 8 उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः

उपसर्ग

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    उपसर्ग दो शब्दों से मिलकर बना है उप + सर्ग। उप का अर्थ है-समीप और सर्ग का अर्थ है-सृष्टि करना अतः उपसर्ग का शाब्दिक अर्थ हुआ किसी शब्द के समीप आकर नया शब्द निर्माण।

    उपसर्ग की परिभाषा
    संस्कृत में उस अव्यय या शब्दांश को उपसर्ग कहते हैं जो कुछ शब्दों के आरम्भ में जुड़कर उनके अर्थों का विस्तार करते हैं या उनमें विशेष परिवर्तन करते हैं।

    जैसे – वि + हारः = विहारः
    उप + हारः = उपहारः
    सु + गन्धः = सुगन्धः
    सु + कन्याः = सुकन्याः

    Abhyasvan Bhav Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 8 उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः 1

    प्रश्न 1.
    उपसर्गान् संयुज्य पदरचनां कुरुत (पृष्ठ 93)
    उत्तर:

    Abhyasvan Bhav Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 8 उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः 2

    वि
    विशेषः (वि + शेषः)
    विकारः (वि + कारः)
    विहारः (वि + हारः)
    विहाय (वि + हायः)

    सु
    सुगन्धः (सु + गन्धः)
    सुकन्या (सु + कन्या)
    सुबुद्धिः (सु + बुद्धिः)
    सुदर्शन (सु + दर्शन)

    Abhyasvan Bhav Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 8 उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः 3

    अप
    अपमानः (अप + मानः)
    अपयशः (अप + यशः)
    अपकारः (अप + कारः)

    दुर्
    दुर्दशा (दुर् + दशा)
    दुर्बुद्धिः (दुर् + बुद्धिः )
    दुर्जनः (दुर् + जनः)
    दुराचारी (दुर् + आचारी)

    प्रश्न 2.
    उपसर्ग संयुज्य उचितैः धातुरूपैः रिक्तस्थानानि पूरयत
    अभ्यासपुस्तकम् पृष्ठ संख्या 94 देखें।
    उत्तर:
    (i) निस्सरति
    (ii) आगच्छन्
    (iii) परिपालयामः
    (iv) उत्तिष्ठन्तु
    (v) अनुसरति
    (vi) अवगच्छेः
    (vii) उद्भवति
    (viii) उपसेवन्ते
    (ix) अनुभवामि

    प्रश्न 3.
    उचितैः उपसर्गयुक्तैः पदैः रिक्तस्थानानि पूरयत (पृष्ठ 94)
    अभ्यासपुस्तकम् पृष्ठ संख्या 94 देखें। ।
    उत्तर:
    (i) दुर्गमः
    (ii) उल्लेखम्
    (iii) निर्धनस्य, अपमानः
    (iv) दुःसाहसम्, अपमानम्
    (v) निःसन्देहम्, सम्मानम्
    (vi) संरक्षणम्

    अव्ययपदानि

    जिन शब्दों पर रूप रचना, लिंग, वचन, कारक आदि का कोई प्रभाव नहीं पड़ता उन्हें अव्यय पद कहते हैं। उदाहरण के लिए कुछ शब्द निम्न हैं परितः (चारों ओर), अधुना (अब), सदा (हमेशा), शनैः-शनैः (धीरे-धीरे) आदि।

    प्रश्न 1.
    निम्नलिखितानाम् अव्ययानाम् रिक्तस्थानेषु प्रयोगं कुरुत
    सहसा, अपि, सर्वदा, यदा, अचिरम्, श्वः, ह्यः, इदानीम्, तदा
    (i) …… …… निर्णयः न करणीयः।
    (ii) …… गृहम् गच्छ।
    (iii) अहम् …………….. वाराणसी गमिष्यामि।
    (iv) …………… प्रातः भ्रमणं कुर्यात्।
    (v) …… मम गृहे उत्सवः आसीत्।
    (vi) …………………………… अहं संस्कृतं पठामि।
    (vii) त्वम् किं ………………………. गच्छसि?
    (viii) ……………… अहम् गमिष्यामि ……. सः अत्र आगमिष्यति।
    उत्तर:
    (i) सहसा
    (ii) इदानीम्
    (iii) श्वः
    (iv) सर्वदा
    (v) ह्यः
    (vi) अपि
    (vii) अचिरम्
    (viii) यदा, तदा

    प्रश्न 2.
    अधोलिखितेषु वाक्येषु अव्ययपदानि प्रयुक्तानि यपदं चित्वा यथास्थानं लिखत
    अभ्यासपुस्तकम् पृष्ठ संख्या 96-97 देखें।
    उत्तर:
    (i) यावत्, न, तावत्
    (ii) वृथा, न
    (iii) सम्प्रति
    (iv) यत्र-यत्र, तत्र-तत्र
    (v) पुरा
    (vii) अद्य, प्रभृति, न
    (viii) ईषत्
    (ix) मुहर्मुहः
    (x) भूयोभूयः

    प्रश्न 3.
    कोष्ठकेभ्यः शुद्धम् अव्ययपदं चित्वा रिक्तस्थानं पूरयत
    अभ्यासपुस्तकम् पृष्ठ संख्या 97 देखें।
    उत्तर:
    (i) ध्रुवम्
    (ii) उच्चैः
    (iii) उच्चैः
    (iv) अधुना
    (v) कुत्र
    (vi) मा
    (vii) तूष्णीं
    (viii) अपि

    प्रश्न 4.
    निम्नलिखित-अव्ययपदानां रिक्तस्थानेषु प्रयोगं कुरुत (पृष्ठ 98)
    कुतः, सहसा, नूनम्, यदि-तर्हि, प्रायः, अद्य, चिरम्, अथ, सर्वत्र, सदा
    अभ्यासपुस्तकम् पृष्ठ संख्या 98 देखें।
    उत्तर:
    (i) कुतः
    (ii) यदि, तर्हि
    (iii) सहसा
    (iv) प्रायः
    (v) नूनम्
    (vi) अद्य
    (vii) सदा
    (viii) अथ
    (ix) सर्वत्र
    (x) प्रायः

    प्रत्ययाः
    किसी भी धातु या शब्द के पश्चात् जुड़ने वाले शब्दांशों को प्रत्यय कहा जाता है।

    • धातुओं में जुड़ने वाले प्रत्ययों को कृत् प्रत्यय कहते हैं।
    • संज्ञा शब्दों में जड़ने वाले प्रत्ययों को तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
    • पुंल्लिङ्ग से स्त्रीलिङ्ग बनाने के लिए शब्दों में प्रयुक्त होने वाले प्रत्ययों को स्त्री प्रत्यय कहते हैं।

    कृदन्तप्रत्ययाः

    क्त्वा-प्रत्ययः
    वाक्य में मुख्य क्रिया से पूर्व किए गए कार्य में पूर्वकालिक क्रिया को व्यक्त करने के लिए धातु में क्त्वा प्रत्यय का योग किया जाता है।

    प्रश्न 1.
    कोष्ठके प्रदत्तधातुषु क्त्वाप्रत्ययप्रयोगेण रिक्तस्थानानि पूरयत (पृष्ठ 100-101)
    (i) रामः रावणं ………………………… सीतां प्राप्नोत्। (हन्)
    (ii) प्रश्नस्य उत्तरं ………… छात्रः प्रसीदति। (ज्ञा)
    (iii) सीता गीतायै पुस्तकं ……………… गच्छति। (दा)
    (iv) सा कथां ………….. श्रावयति। (लिख)
    (v) श्रोतारः कथा ………………… प्रसन्नाः भवन्ति। (श्रु)
    (vi) बालाः …………………………… आगच्छन्ति। (धाव)
    (vii) पुष्पं …………………………… प्रसीदामः। (घ्रा)
    (vii) गायकः गीतं …………………. … संतुष्टि प्राप्नोति। (ग)
    उत्तर:
    (i) हत्वा
    (ii) ज्ञात्वा
    (iii) दत्वा
    (iv) लिखित्वा
    (v) श्रुत्वा
    (vi) धावित्वा
    (vii) घ्रात्वा
    (viii) गायित्वा

    ल्यप् प्रत्ययः
    जहाँ धातु से पूर्व कोई उपसर्ग लगा होता है वहाँ क्त्वा के स्थान पर ल्यप् प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।

    प्रश्न 2.
    अधुना एतानि वाक्यानि पठन्तु भेदं चावगच्छन्तु (पृष्ठ 100)
    अभ्यासपुस्तकम् पृष्ठ संख्या 100 देखें।
    उत्तर:
    (i) ल्यप्
    (ii) समाप्य
    (iii) आ + रुह् + ल्यप्
    (iv) आ + दा + ल्यप्

    प्रश्न 3.
    समुचितप्रत्यय-प्रयोगेण वाक्यानि पूरयत (पृष्ठ 101) छात्रः कक्षायाम् ……………….. (उत्थाय/उत्थात्वा) प्रश्नं पृच्छति। शिक्षकः उत्तरम् ………… (प्रदात्वा/प्रदाय) तं सन्तोषयति। छात्रः उत्तरं ……………… (ज्ञात्वा/ज्ञाय) प्रसन्नः भवति। सन्तुष्टः (भूत्वा/भवित्वा) पाठम् च सम्यक् ………… (अवगत्वा/अवगत्य) गृहं गच्छति।
    उत्तर:
    उत्थाय, प्रदाय, ज्ञात्वा, भूत्वा, अवगत्य।

    तुमुन् प्रत्ययः
    क्रिया को करने के लिए धातु के साथ तुमुन् प्रत्यय लगाया जाता है।

    प्रश्न 4.
    उपरि प्रयुक्तानां तुमुन्-प्रत्ययान्तपदानां प्रकृति-प्रत्यय-विभागं कृत्वा लिखत
    अभ्यासपुस्तकम् पृष्ठ संख्या 101-102 देखें।।
    उत्तर:
    (i) दृश् + तुमुन्
    (ii) पा + तुमुन्
    (iii) नृत् + तुमुन्
    (iv) गम् + तुमुन्
    (v) क्री + तुमुन्

    प्रश्न 5.
    अधुना कोष्ठके प्रदत्तधातुषु तुमुन् प्रत्ययस्य योगेन रिक्तस्थानानि पूरयत- (पृष्ठ 102)
    एक: चौरः एकस्मिन् गृहे चौर्यं कृत्वा ………… (धाव) इच्छति। गृहस्वामी तं दृष्ट्वा तं …………….. (गृह) धावति। मार्गे एकः वत्सः धेनोः क्षीरं ……………… …………….. (पा) तिष्ठति। छात्राः अपि …………… (पठ्) विद्यालयं गच्छन्ति स्म। अतः जनसम्म धेनुना आहतः चौरः आत्मानं …………… (रक्ष्) असमर्थः अभवत्। अतः गृहस्वामी जनैः सह चौरं ……….. (बध्) समर्थः अभवत्।
    उत्तर:
    धावितुम्, ग्रहीतुम्, पातुम्, पठितुम्, रक्षितुम्, बधितुम्।

    शत-प्रत्ययः

    एक कार्य को करते हुए जब अन्य कार्य भी क्रिया जा रहा हो तो परस्मैपदी धातु के साथ शतृ प्रत्यय तथा आत्मनेपदी धातुओं में शानच् प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।

    प्रश्न 2.
    अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा अधुना एतत्सर्वम् प्रयोगेण जानीमः
    ‘यथा- (गम् + शतृ) गन्छन्त्या बालिकया फलं खाद्यते।
    अभ्यासपुस्तकम् पृष्ठ संख्या 103 देखें।
    उत्तर:
    (i) हसन्तम्
    (ii) यच्छते
    (iii) पश्यन्तः
    (iv) प्रच्छद्भिः

    प्रश्न 3.
    अधुना समुचितपदप्रयोगेण रिक्तस्थानानि पूरयत
    अभ्यासपुस्तकम् पृष्ठ संख्या 103 देखें।
    उत्तर:
    (i) गणयन्
    (ii) पिबता
    (iii) पालयन्ती
    (iv) पचते
    (v) पश्यन्

    शानच्-प्रत्ययः

    इस प्रत्यय का प्रयोग वर्तमानकाल के अर्थ में होता है। धातु के साथ मिलकर शानच् का ‘आन’ शेष रहता है। आत्मनेपदी धातु से शानच् प्रत्यय जुड़ता है।

    प्रश्न 1.
    अधुना समुचितपदप्रयोगेण रिक्तस्थानानि पूरयत
    उत्तर:
    (i) ईक्षमाणाः
    (ii) वर्धमाना
    (iii) कम्पमानम्
    (iv) शोभमानसु
    (v) सेवमानायै

    प्रश्न 2.
    उदाहरणानुसार पूर्वक्रियायां शत/शानच् प्रत्यय-प्रयोगेण वाक्यानि पुनः लिखत
    अभ्यासपुस्तकम् पृष्ठ संख्या 104 देखें।
    उत्तर:
    (i) उपदिशन् उपदेशकः ज्ञानवात करोति।
    (ii) गायन्ती उषा उद्याने भ्रमति।
    (iii) प्रहरन् सैनिकः युद्धक्षेत्रे शत्रु मारयति।
    (iv) दुग्धं पिबन्ती बालिका प्रसन्ना भवति।
    (v) दुःखं सहमानः मोहनः ईश्वरं प्रार्थयति।

    क्तिन् प्रत्ययः

    देश की बहुत-सी भाषाओं में क्तिन् प्रत्ययान्त शब्दों का प्रयोग होता है। जिन्हें आसानी से समझा जा सकता

    प्रश्न 1.
    अधोलिखितवाक्येभ्यः क्तिन्-प्रत्ययुक्तान् शब्दान् आदाय उदाहरणानुसारं प्रकृति-प्रत्यय-विभागं कुरुत (पृष्ठ 105)
    Abhyasvan Bhav Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 8 उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः 4

    तद्धितप्रत्ययाः

    मतुप् (यत्)
    ‘मतुप्’ प्रत्यय का प्रयोग ‘वाला’ अर्थात् ‘इसके पास है’ इस अर्थ में स्वरान्त शब्दों में प्रयोग किया जाता है। उप् का लोप होकर शब्दों में ‘मत्’ जुड़ता है। अकारान्त, आकारान्त और हलन्त शब्दों में ‘वतुप्’ (वत्) प्रत्यय जुड़ता है।

    1. समुचितशब्दं (✓) इति चिह्नन चिह्नी कुरुत, प्रदत्तस्थाने च लिखत- (पृष्ठ 105-106)
    (i) मधुवान/मधुमान मधः खादति। …………..
    (ii) बलवन्तं/बलमन्तं जनं पश्य। ………….
    (iii) विद्यामान्/विद्यावान् जगति शोभते। ……..
    (iv) रूपवता/रूपमता स्वरूपस्य गर्वः न करणीयः। ……….
    (v) कीर्तिमता/कीर्तिवता कविकालिदासेन अभिज्ञानशाकुन्तलं नाम नाटकं रचितम्। …………
    उत्तर:
    (i) मधुमान्
    (ii) बलवन्तं
    (iii) विद्यावान्
    (iv) रूपवता
    (v) कीर्तिमता

    णिनि (इनि/इन्)

    ‘वाला’ या ‘युक्त’ अर्थ में अकारान्त शब्दों से णिनि (इति/इन्) प्रत्यय का योग किया जाता है।

    1.विशेषण-विशेष्य पदानि योजयत (पृष्ठ 106)
    Abhyasvan Bhav Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 8 उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः 5
    .
    तरप्-तमप्
    तरप् (तर)-दो में से किसी एक को बेहतर बताने के लिए ‘तरप्’ प्रत्यय का प्रयोग किया जात है। शब्दों में केवल ‘तर’ ही जुड़ता है।
    तमप् (तम)-दो से अधिक में किसी एक की श्रेष्ठता प्रकट करने के लिए ‘तमप्’ (तम) प्रत्यय का प्रयोग होता है। शब्दों में केवल ‘तम’ ही जुड़ता है।

    प्रश्न 1.
    अधोलिखितवाक्येषु समुचितपदेन रिक्तस्थानापूर्तिं कुरुत
    अभ्यासपुस्तकम् पृष्ठ संख्या 107 देखें।
    उत्तर:
    (i) पटुः
    (ii) कुशलतमः
    (iii) मधुरतमम्
    (iv) तीव्रतरः
    (v) कुशलतरा
    (vi) उच्चतमः

    मयट् प्रत्ययः

    प्रचुरता के अर्थ में ‘मयट्’ (मय) प्रत्यय का शब्दों के साथ प्रयोग होता है। शब्द में केवल ‘मय’ ही जुड़ता है। वस्तुवाचक शब्दों में (खाद्यवस्तुओं को छोड़कर) विकार अर्थ में भी मयट् (मय) प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
    1. मयट् प्रत्यययुक्तानि पदानि आदाय प्रकृति-प्रत्यय-विभागं कुरुत (पृष्ठ 107)
    Abhyasvan Bhav Sanskrit Class 9 Solutions Chapter 8 उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः 6

    अभ्यासः (पृष्ठ 108)

    प्रश्न 1.
    प्रदत्तवाक्येषु लिङ्गपरिवर्तनं कृत्वा वाक्यानि पुनः लिखत
    यथा-एकः बालः जलं पातुम् इच्छति। — एका बालिका जलं पातुम् इच्छति।
    (i) सः सेविकाम् आकारयति। — सा सेवकम् अकारयति।
    (ii) अस्य नाटकस्य नायकः कः अस्ति? — अस्य नाटकस्य नायिका का अस्ति?
    (iii) आचार्यः स्नेहेन पाठयति। — आचार्या स्नेहेन पाठयति।
    (iv) चतुरा बालिका सम्माननीया। — चतुरः बालकः सम्मानीयः।
    (v) श्रीमान् कुत्र गच्छति? — श्रीमती कुत्र गच्छति?
    (vi) सभायाम् अनेके विद्वांसः आगच्छन्। — सभायाम् अनेकाः विदुष्यः आगच्छन्।
    (vii) बुद्धिमान् बालः पुरस्कारं लभते। — बुद्धिमती बाला पुरस्कारं लभते।
    (vii) गतवती महिला किम् उक्तवती? — गतवान् पुरुषः किम् उक्तवान्?

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