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By rohit.pandey1
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Updated on 2 Jan 2026, 14:42 IST
NCERT Solutions for Class 8 Hindi are prepared to help students understand each chapter of the NCERT Hindi textbook in a clear and structured manner. These solutions are based on the latest CBSE syllabus and follow the prescribed textbook used in CBSE Board. Each answer is written in simple and easy-to-understand Hindi, making it suitable for regular school studies as well as exam preparation.
The NCERT Class 8 Hindi syllabus primarily includes the textbook Malhar, which is currently followed in most CBSE schools. On this page, students can find chapter-wise NCERT Solutions for Class 8 Hindi, covering all textbook questions with accurate and exam-oriented answers.
These Class 8 Hindi NCERT Solutions are useful for students who want to revise lessons, complete homework, or prepare for periodic tests and annual examinations. As the answers strictly follow NCERT Solutions guidelines, they help students write relevant and well-structured responses in exams.
The NCERT Class 8 Hindi Malhar textbook includes a collection of engaging stories and poems. Students can use the links given below to access chapter-wise NCERT Solutions for Class 8 Hindi, including summaries and question-answer solutions for each Malhar chapter.
| NCERT Solutions for Class 8 Hindi Malhar | Download PDF |
| NCERT Solutions for Chapter 1 Svadesh (स्वदेश) | |
| NCERT Solutions for Chapter 2 Do Gauraiya (दो गौरैया) | |
| NCERT Solutions for Chapter 3 Ek Aashirvad (एक आशीर्वाद) | |
| NCERT Solutions for Chapter 4 Haridwar (हरिद्वार) | |
| NCERT Solutions for Chapter 5 Kabeer Ke Dohe (कबीर के दोहे) | |
| NCERT Solutions for Chapter 6 Ek Tokari Bhar Mitti | |
| NCERT Solutions for Chapter 7 Mat Baandho (मत बाँधो) | |
| NCERT Solutions for Chapter 8 Nae Mehamaan (नए मेहमान) | |
| NCERT Solutions for Chapter 9 Aadami Ka Anupat | |
| NCERT Solutions for Chapter 10 Tarun Ke Swapn |
Below is a chapter-wise breakdown of the CBSE Class 8 Hindi syllabus. We have highlighted the most important topics and questions that appear frequently in exams.
‘स्वदेश’ पाठ देश-प्रेम और स्वदेशी भावना पर आधारित है। इस अध्याय में लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि व्यक्ति को अपने देश, उसकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं पर गर्व होना चाहिए। विदेशी वस्तुओं के आकर्षण के बजाय अपने देश की वस्तुओं को अपनाने का संदेश दिया गया है। यह पाठ छात्रों में राष्ट्रीय चेतना और आत्मसम्मान की भावना विकसित करता है।
इस पाठ का मुख्य विषय स्वदेश-प्रेम और आत्मनिर्भरता है। लेखक यह संदेश देता है कि अपने देश की वस्तुओं और मूल्यों को अपनाना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
इस अध्याय के अध्ययन से छात्र देश-प्रेम का महत्व समझते हैं, स्वदेशी सोच विकसित करते हैं और अपने विचारों को स्पष्ट व संतुलित भाषा में व्यक्त करना सीखते हैं।

प्रश्न 1: ‘स्वदेश’ पाठ में लेखक ने स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने पर क्यों ज़ोर दिया है?
उत्तर: लेखक ने स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने पर इसलिए ज़ोर दिया है क्योंकि इससे देश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है और आत्मनिर्भरता बढ़ती है। स्वदेशी वस्तुएँ देश की संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी होती हैं, इसलिए उनका उपयोग करना देश-प्रेम का प्रतीक है।

JEE

NEET

Foundation JEE

Foundation NEET

CBSE
प्रश्न 2: लेखक के अनुसार विदेशी वस्तुओं के प्रति आकर्षण के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं?
उत्तर: लेखक के अनुसार विदेशी वस्तुओं के प्रति अत्यधिक आकर्षण से देश की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है। इससे स्वदेशी उद्योगों को नुकसान पहुँचता है और लोगों में अपने देश के प्रति हीन भावना उत्पन्न हो सकती है।
प्रश्न 3: ‘स्वदेश’ पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: ‘स्वदेश’ पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने देश, उसकी भाषा और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। स्वदेशी वस्तुओं को अपनाकर हम देश के विकास में योगदान दे सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

प्रश्न 4: स्वदेशी भावना को अपनाने से समाज को क्या लाभ होते हैं?
उत्तर: स्वदेशी भावना को अपनाने से समाज में राष्ट्रीय एकता और आत्मसम्मान की भावना विकसित होती है। इससे स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, जिससे समाज और देश दोनों का विकास होता है।
‘दो गौरैया’ पाठ एक संवेदनशील और भावनात्मक कहानी है, जिसमें दो नन्हीं चिड़ियों के माध्यम से करुणा, दया और सह-अस्तित्व का संदेश दिया गया है। इस अध्याय में लेखक ने मनुष्य और प्रकृति के संबंध को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। कहानी यह बताती है कि छोटे जीवों के प्रति भी प्रेम और जिम्मेदारी का भाव होना चाहिए।
इस पाठ का मुख्य विषय करुणा और मानवीय संवेदनशीलता है। लेखक यह संदेश देता है कि सभी जीवों के साथ प्रेम और सहानुभूति से व्यवहार करना चाहिए।
इस अध्याय के अध्ययन से छात्र दया और सह-अस्तित्व का महत्व समझते हैं, जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनते हैं और अपने विचारों को सरल व प्रभावी भाषा में व्यक्त करना सीखते हैं।
प्रश्न 1: ‘दो गौरैया’ कहानी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: ‘दो गौरैया’ कहानी का मुख्य उद्देश्य पाठकों में दया, करुणा और संवेदनशीलता की भावना जाग्रत करना है। लेखक यह दिखाना चाहता है कि छोटे जीवों के प्रति प्रेम और सहानुभूति रखना भी मानवीय गुण है।
प्रश्न 2: कहानी में गौरैयों के साथ कैसा व्यवहार किया गया है?
उत्तर: कहानी में गौरैयों के साथ स्नेहपूर्ण और संवेदनशील व्यवहार किया गया है। उन्हें सुरक्षित रखने और उनकी देखभाल करने का प्रयास किया गया है, जिससे मनुष्य की करुणामयी प्रकृति प्रकट होती है।
प्रश्न 3: लेखक ने दो गौरैयों के माध्यम से कौन-सा संदेश दिया है?
उत्तर: लेखक ने दो गौरैयों के माध्यम से यह संदेश दिया है कि हमें सभी जीवों के साथ प्रेम और दया से व्यवहार करना चाहिए। प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति जिम्मेदारी का भाव समाज को बेहतर बनाता है।
प्रश्न 4: इस पाठ से छात्रों को क्या सीख मिलती है?
उत्तर: इस पाठ से छात्रों को यह सीख मिलती है कि जीवन में करुणा और संवेदनशीलता बहुत महत्वपूर्ण हैं। छोटे और कमजोर जीवों की रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है।
‘एक आशीर्वाद’ पाठ मानवीय संवेदनाओं और जीवन-मूल्यों पर आधारित है। इस अध्याय में लेखक ने एक साधारण घटना के माध्यम से स्नेह, शुभकामना और आशीष के महत्व को स्पष्ट किया है। पाठ यह दर्शाता है कि सच्चे मन से दिया गया आशीर्वाद व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। यह अध्याय छात्रों में मानवीय संबंधों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करता है।
इस पाठ का मुख्य विषय स्नेह और सद्भावना है। लेखक यह संदेश देता है कि प्रेम और शुभकामनाएँ जीवन को सही दिशा देने में सहायक होती हैं।
इस अध्याय के अध्ययन से छात्र मानवीय मूल्यों का महत्व समझते हैं, आपसी संबंधों में संवेदनशीलता विकसित करते हैं और अपने विचारों को स्पष्ट तथा संतुलित भाषा में व्यक्त करना सीखते हैं।
प्रश्न 1: ‘एक आशीर्वाद’ पाठ का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर: ‘एक आशीर्वाद’ पाठ का मुख्य भाव स्नेह और शुभकामना है। लेखक यह बताता है कि सच्चे मन से दिया गया आशीर्वाद व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।
प्रश्न 2: लेखक के अनुसार आशीर्वाद का क्या महत्व है?
उत्तर: लेखक के अनुसार आशीर्वाद व्यक्ति को मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करता है। यह जीवन में आशा और प्रेरणा का संचार करता है, जिससे कठिन परिस्थितियों का सामना करना आसान हो जाता है।
प्रश्न 3: पाठ में मानवीय संबंधों को किस प्रकार प्रस्तुत किया गया है?
उत्तर: पाठ में मानवीय संबंधों को प्रेम, सम्मान और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। लेखक यह दर्शाता है कि अच्छे संबंध जीवन को सुखद और सार्थक बनाते हैं।
प्रश्न 4: ‘एक आशीर्वाद’ पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: ‘एक आशीर्वाद’ पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें दूसरों के प्रति स्नेह और सद्भावना का भाव रखना चाहिए। सकारात्मक सोच और शुभकामनाएँ समाज में सौहार्द बढ़ाती हैं।
‘हरिद्वार’ पाठ एक यात्रा-वर्णन है, जिसमें लेखक ने हरिद्वार नगर की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विशेषताओं का वर्णन किया है। इस अध्याय में गंगा नदी, घाटों और श्रद्धालुओं की आस्था को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। पाठ भारत की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को समझने में सहायता करता है।
इस पाठ का मुख्य विषय धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा है। लेखक यह संदेश देता है कि तीर्थ स्थल केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना के भी केंद्र होते हैं।
इस अध्याय के अध्ययन से छात्र भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के बारे में जान पाते हैं, यात्रा-वर्णन को समझते हैं और अपने अनुभवों को क्रमबद्ध ढंग से व्यक्त करना सीखते हैं।
प्रश्न 1: ‘हरिद्वार’ को एक प्रमुख तीर्थ स्थल क्यों माना जाता है?
उत्तर: हरिद्वार को एक प्रमुख तीर्थ स्थल इसलिए माना जाता है क्योंकि यहाँ गंगा नदी पर्वतों से मैदानों में प्रवेश करती है। यह स्थान धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है और यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं।
प्रश्न 2: लेखक ने हरिद्वार के घाटों का वर्णन किस प्रकार किया है?
उत्तर: लेखक ने हरिद्वार के घाटों का वर्णन अत्यंत श्रद्धा और शांत वातावरण के रूप में किया है। घाटों पर स्नान करते श्रद्धालु, पूजा-अर्चना और गंगा की निर्मल धारा का दृश्य वातावरण को पवित्र बनाता है।
प्रश्न 3: इस पाठ में गंगा नदी का क्या महत्व बताया गया है?
उत्तर: इस पाठ में गंगा नदी को पवित्र और जीवनदायिनी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। लेखक के अनुसार गंगा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा से भी गहराई से जुड़ी हुई है।
प्रश्न 4: ‘हरिद्वार’ पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: ‘हरिद्वार’ पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। साथ ही, धार्मिक स्थलों की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना भी हमारा कर्तव्य है।
‘कबीर के दोहे’ पाठ में संत कबीरदास के प्रसिद्ध दोहों के माध्यम से जीवन की सच्चाइयों और नैतिक मूल्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। इन दोहों में आडंबरहीन भक्ति, आत्मज्ञान और मानवीय व्यवहार पर बल दिया गया है। कबीर अपने दोहों के द्वारा समाज में फैली कुरीतियों पर प्रहार करते हैं और सही जीवन-पथ का मार्ग दिखाते हैं।
इस पाठ का मुख्य विषय आत्मज्ञान, सच्ची भक्ति और नैतिक जीवन है। कबीरदास यह संदेश देते हैं कि आडंबर और बाहरी दिखावे के बजाय मन की शुद्धता और सत्य आचरण आवश्यक है।
इस अध्याय के अध्ययन से छात्र कबीर के विचारों को समझते हैं, जीवन में सच्चाई और सरलता का महत्व जान पाते हैं तथा अपने विचारों को संक्षिप्त और प्रभावी भाषा में व्यक्त करना सीखते हैं।
प्रश्न 1: कबीर के दोहों में सच्ची भक्ति की क्या पहचान बताई गई है?
उत्तर: कबीर के दोहों में सच्ची भक्ति की पहचान मन की शुद्धता और सच्चे आचरण से बताई गई है। उनके अनुसार केवल बाहरी पूजा-पाठ या आडंबर से भक्ति नहीं होती, बल्कि सच्चे मन से ईश्वर को स्मरण करना ही वास्तविक भक्ति है।
प्रश्न 2: कबीरदास ने आडंबर का विरोध क्यों किया है?
उत्तर: कबीरदास ने आडंबर का विरोध इसलिए किया है क्योंकि इससे मनुष्य सत्य से दूर हो जाता है। उनके अनुसार आडंबर मनुष्य को भ्रमित करता है और आत्मज्ञान के मार्ग में बाधा बनता है।
प्रश्न 3: कबीर के दोहे समाज को क्या संदेश देते हैं?
उत्तर: कबीर के दोहे समाज को सत्य, प्रेम और समानता का संदेश देते हैं। वे जाति-पाँति और दिखावे का विरोध करते हुए मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं।
प्रश्न 4: ‘कबीर के दोहे’ पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: ‘कबीर के दोहे’ पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में सत्य और सरलता को अपनाना चाहिए। आडंबर छोड़कर आत्मज्ञान और सच्चे व्यवहार के मार्ग पर चलना ही मानव जीवन का उद्देश्य है।
‘एक टोकरी भर मिट्टी’ पाठ परिश्रम, लगन और दृढ़ संकल्प के महत्व को दर्शाने वाली प्रेरक कहानी है। इस अध्याय में लेखक ने यह बताया है कि छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन ला सकते हैं। कहानी यह सिखाती है कि निरंतर मेहनत और धैर्य से असंभव कार्य भी संभव हो सकता है।
इस पाठ का मुख्य विषय परिश्रम और आत्मविश्वास है। लेखक यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं माननी चाहिए और लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।
इस अध्याय के अध्ययन से छात्र मेहनत और धैर्य का महत्व समझते हैं, आत्मविश्वास विकसित करते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करना सीखते हैं।
प्रश्न 1: ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी का मुख्य संदेश यह है कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े परिणाम ला सकते हैं। निरंतर परिश्रम और दृढ़ निश्चय से कठिन से कठिन कार्य भी पूरा किया जा सकता है।
प्रश्न 2: कहानी में परिश्रम को क्यों महत्वपूर्ण बताया गया है?
उत्तर: कहानी में परिश्रम को इसलिए महत्वपूर्ण बताया गया है क्योंकि बिना मेहनत के सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती। लेखक यह दर्शाता है कि लगातार प्रयास करने से ही लक्ष्य तक पहुँचा जा सकता है।
प्रश्न 3: इस पाठ में धैर्य की क्या भूमिका बताई गई है?
उत्तर: इस पाठ में धैर्य को सफलता की कुंजी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। धैर्य रखने से व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक बना रहता है और अपने प्रयास जारी रखता है।
प्रश्न 4: ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ पाठ से छात्रों को क्या सीख मिलती है?
उत्तर: इस पाठ से छात्रों को यह सीख मिलती है कि जीवन में मेहनत और आत्मविश्वास अत्यंत आवश्यक हैं। निरंतर प्रयास और धैर्य से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
‘मत बाँधो’ पाठ स्वतंत्र सोच और मानसिक बंधनों से मुक्ति का संदेश देता है। इस अध्याय में लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि मनुष्य को रूढ़ियों, अंधविश्वासों और संकीर्ण विचारों में नहीं बँधना चाहिए। पाठ यह सिखाता है कि स्वतंत्र विचार और विवेकपूर्ण सोच से ही व्यक्ति सही निर्णय ले सकता है।
इस पाठ का मुख्य विषय स्वतंत्र विचार और मानसिक मुक्ति है। लेखक यह संदेश देता है कि व्यक्ति को परंपराओं का सम्मान करते हुए भी विवेक और तर्क के आधार पर सोचने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
इस अध्याय के अध्ययन से छात्र स्वतंत्र सोच का महत्व समझते हैं, तर्कशील दृष्टिकोण अपनाते हैं और सामाजिक रूढ़ियों का मूल्यांकन करना सीखते हैं।
प्रश्न 1: ‘मत बाँधो’ पाठ का मुख्य आशय क्या है?
उत्तर: ‘मत बाँधो’ पाठ का मुख्य आशय यह है कि मनुष्य को अपनी सोच को संकीर्ण विचारों और रूढ़ियों में नहीं बाँधना चाहिए। स्वतंत्र और विवेकपूर्ण सोच से ही जीवन में सही दिशा मिलती है।
प्रश्न 2: लेखक ने मानसिक बंधनों से मुक्त होने की आवश्यकता क्यों बताई है?
उत्तर: लेखक ने मानसिक बंधनों से मुक्त होने की आवश्यकता इसलिए बताई है क्योंकि ऐसे बंधन व्यक्ति की प्रगति में बाधा बनते हैं। स्वतंत्र सोच से व्यक्ति नई संभावनाओं को समझ पाता है और सही निर्णय ले सकता है।
प्रश्न 3: इस पाठ में तर्कशील सोच को क्यों महत्व दिया गया है?
उत्तर: इस पाठ में तर्कशील सोच को इसलिए महत्व दिया गया है क्योंकि तर्क के आधार पर किया गया निर्णय अधिक उचित और व्यावहारिक होता है। इससे अंधविश्वास और गलत धारणाओं से बचा जा सकता है।
प्रश्न 4: ‘मत बाँधो’ पाठ से छात्रों को क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: ‘मत बाँधो’ पाठ से छात्रों को यह शिक्षा मिलती है कि उन्हें स्वतंत्र और विवेकपूर्ण सोच अपनानी चाहिए। समाज की परंपराओं को समझते हुए भी सही और गलत में अंतर करना आवश्यक है।
‘नए मेहमान’ पाठ मानवीय संबंधों और सामाजिक व्यवहार पर आधारित एक रोचक कहानी है। इस अध्याय में लेखक ने यह दिखाया है कि अतिथियों के आगमन से घर का वातावरण किस प्रकार बदल जाता है। कहानी के माध्यम से पारिवारिक जीवन, अतिथि सत्कार और धैर्य जैसे गुणों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
इस पाठ का मुख्य विषय अतिथि सत्कार और सामाजिक संवेदनशीलता है। लेखक यह संदेश देता है कि दूसरों के प्रति सम्मान और संयम बनाए रखना अच्छे मानवीय संबंधों की पहचान है।
इस अध्याय के अध्ययन से छात्र सामाजिक व्यवहार का महत्व समझते हैं, धैर्य और सहनशीलता विकसित करते हैं तथा पारिवारिक संबंधों की भूमिका को समझना सीखते हैं।
प्रश्न 1: ‘नए मेहमान’ पाठ का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: ‘नए मेहमान’ पाठ का मुख्य विषय अतिथि सत्कार और पारिवारिक जीवन में आने वाले बदलाव हैं। लेखक यह दिखाता है कि मेहमानों के आने से घर के सदस्यों की दिनचर्या और व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है।
प्रश्न 2: कहानी में मेहमानों के आगमन से घर का वातावरण कैसे बदल जाता है?
उत्तर: कहानी में मेहमानों के आगमन से घर का वातावरण व्यस्त और कभी-कभी असुविधाजनक हो जाता है। घर के सदस्यों को अपनी सुविधाओं का त्याग करना पड़ता है, जिससे धैर्य और समझदारी की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 3: इस पाठ में लेखक ने किन मानवीय गुणों पर जोर दिया है?
उत्तर: इस पाठ में लेखक ने धैर्य, संयम और सहनशीलता जैसे मानवीय गुणों पर जोर दिया है। वह यह बताना चाहता है कि अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए इन गुणों का होना आवश्यक है।
प्रश्न 4: ‘नए मेहमान’ पाठ से छात्रों को क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: ‘नए मेहमान’ पाठ से छात्रों को यह शिक्षा मिलती है कि हमें अतिथियों के प्रति सम्मान और सहनशीलता का व्यवहार करना चाहिए। कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखना सामाजिक जीवन के लिए आवश्यक है।
‘आदमी का अनुपात’ पाठ समाज में मनुष्य के मूल्य और उसके आचरण पर आधारित एक विचारात्मक रचना है। इस अध्याय में लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति की महानता उसके बाहरी रूप या पद से नहीं, बल्कि उसके विचारों, व्यवहार और मानवीय गुणों से मापी जानी चाहिए। पाठ मानवता, समानता और नैतिकता का संदेश देता है।
इस पाठ का मुख्य विषय मानवीय मूल्यों और नैतिकता है। लेखक यह संदेश देता है कि समाज में व्यक्ति का वास्तविक मूल्य उसके चरित्र और कर्मों से निर्धारित होता है।
इस अध्याय के अध्ययन से छात्र मानवीय गुणों का महत्व समझते हैं, व्यक्ति के आचरण का मूल्यांकन करना सीखते हैं और समाज के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण विकसित करते हैं।
प्रश्न 1: ‘आदमी का अनुपात’ पाठ का मुख्य विचार क्या है?
उत्तर: ‘आदमी का अनुपात’ पाठ का मुख्य विचार यह है कि मनुष्य का मूल्य उसके पद, धन या बाहरी स्वरूप से नहीं, बल्कि उसके विचारों और आचरण से आँका जाना चाहिए। लेखक मानवता और नैतिकता को सबसे महत्वपूर्ण मानता है।
प्रश्न 2: लेखक के अनुसार मनुष्य की पहचान कैसे होती है?
उत्तर: लेखक के अनुसार मनुष्य की पहचान उसके अच्छे कर्मों, व्यवहार और मानवीय गुणों से होती है। सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के प्रति संवेदनशील और न्यायपूर्ण व्यवहार करता है।
प्रश्न 3: इस पाठ में समानता का क्या महत्व बताया गया है?
उत्तर: इस पाठ में समानता का महत्व यह बताया गया है कि सभी मनुष्य समान होते हैं और किसी को भी छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए। समाज में सम्मान और अधिकार सभी को समान रूप से मिलने चाहिए।
प्रश्न 4: ‘आदमी का अनुपात’ पाठ से छात्रों को क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: ‘आदमी का अनुपात’ पाठ से छात्रों को यह शिक्षा मिलती है कि उन्हें अपने जीवन में नैतिक मूल्यों और मानवता को प्राथमिकता देनी चाहिए। अच्छे विचार और सही आचरण ही व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाते हैं।
‘तरुण’ पाठ युवा अवस्था की ऊर्जा, सोच और जिम्मेदारियों पर आधारित है। इस अध्याय में लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि युवावस्था केवल उत्साह का समय ही नहीं, बल्कि सही दिशा में कार्य करने और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का भी समय है। पाठ युवाओं को सकारात्मक सोच और कर्मशील जीवन अपनाने की प्रेरणा देता है।
इस पाठ का मुख्य विषय युवावस्था की जिम्मेदारी और सकारात्मक दृष्टिकोण है। लेखक यह संदेश देता है कि युवा शक्ति यदि सही मार्ग पर चले तो समाज और देश का भविष्य उज्ज्वल बन सकता है।
इस अध्याय के अध्ययन से छात्र युवावस्था के महत्व को समझते हैं, जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं और अपने लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करना सीखते हैं।
प्रश्न 1: ‘तरुण’ पाठ का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर: ‘तरुण’ पाठ का मुख्य भाव युवावस्था की ऊर्जा और उसकी जिम्मेदारियों को समझाना है। लेखक यह बताता है कि युवाओं को अपने उत्साह का उपयोग सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में करना चाहिए।
प्रश्न 2: लेखक ने युवाओं से क्या अपेक्षा की है?
उत्तर: लेखक ने युवाओं से यह अपेक्षा की है कि वे जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करें और समाज के हित में कार्य करें। उन्हें अपने लक्ष्य स्पष्ट रखकर मेहनत और अनुशासन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
प्रश्न 3: इस पाठ में युवावस्था को महत्वपूर्ण क्यों माना गया है?
उत्तर: इस पाठ में युवावस्था को महत्वपूर्ण इसलिए माना गया है क्योंकि यह जीवन का वह चरण है जिसमें व्यक्ति अपने भविष्य की दिशा तय करता है। सही निर्णय और कर्मशीलता से युवा अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।
प्रश्न 4: ‘तरुण’ पाठ से छात्रों को क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: ‘तरुण’ पाठ से छात्रों को यह शिक्षा मिलती है कि उन्हें अपनी ऊर्जा और समय का सदुपयोग करना चाहिए। जिम्मेदारी, अनुशासन और सकारात्मक सोच अपनाकर वे समाज और देश के विकास में योगदान दे सकते हैं।
The NCERT Solutions for Class 8 Hindi are designed to support students in understanding textbook concepts and improving answer-writing skills. The solutions follow NCERT guidelines and are suitable for school examinations.
Note: This section is applicable only for schools that are still following the older NCERT Hindi textbooks.
Some schools may continue to use previous NCERT books such as Vasant and Durva. For such cases, chapter-wise solutions are provided separately for reference.
NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant
(Includes chapters like लाख की चूड़ियाँ, बस की यात्रा, आदि)
These solutions are prepared according to the respective textbook editions and help students following the older syllabus.
The following preparation guidelines can help students perform better in Class 8 Hindi examinations:
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The NCERT textbook Malhar is currently prescribed for Class 8 Hindi in most CBSE schools. It includes prose, poetry, and value-based chapters as per the latest NCERT syllabus.
These NCERT Solutions for Class 8 Hindi are prepared strictly according to the latest NCERT and CBSE syllabus and follow the Malhar textbook prescribed for the academic session.
NCERT Solutions are sufficient for school examinations as questions are directly based on the textbook. Studying chapter-wise solutions helps students understand themes, improve answer writing, and score well in exams.
Chapter-wise NCERT Solutions for Class 8 Hindi Malhar are available in PDF format for easy offline access and revision.
All answers are written in simple, clear, and student-friendly Hindi, making them suitable for writing in periodic tests and annual examinations.
These solutions cover all textbook questions, including short-answer and long-answer questions, along with chapter summaries and explanations as per NCERT guidelines.
Reading well-structured NCERT answers helps students learn how to frame relevant, clear, and well-organized responses in Hindi examinations.
NCERT Solutions for older NCERT Hindi books such as Vasant and Durva are provided separately for students whose schools are still following the previous syllabus.
Students should first read the chapter from the textbook, attempt the questions independently, and then refer to NCERT Solutions for correction and revision.
NCERT Solutions for Class 8 Hindi are useful for completing homework, revising lessons, and preparing for school examinations.