NCERT Solutions For Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon Ki Katha (दो बैलों की कथा)

By Karan Singh Bisht

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Updated on 22 Jul 2026, 18:15 IST

NCERT Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon Ki Katha Solutions are prepared to help students understand the first chapter of the new Class 9 Hindi textbook Ganga in a simple and exam-focused way. This content is written for the 2026-27 academic session so that students can easily study the chapter, revise important points, and prepare better for school exams.

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NCERT Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon Ki Katha Solutions presents the story of two bulls, Heera and Moti. Through these two characters, Munshi Premchand beautifully explains important human values such as friendship, self-respect, freedom, courage, loyalty, and the struggle against injustice. The story also reflects the spirit of resistance and the desire for freedom in a meaningful way.

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NCERT Solutions For Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Do Bailon Ki Katha (दो बैलों की कथा)

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Question Answer

कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 1 के अभ्यास के प्रश्न उत्तर

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पेज 16 – रचना से संवाद – मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

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1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?

(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता

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(ख) एकता और सहयोग

(ग) गर्व और दंभ

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(घ) विद्रोह और क्रोध

उत्तर:

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(ख) एकता और सहयोग

हीरा और मोती का संबंध पूरी कहानी में एकता और सहयोग का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। दोनों हर कठिन परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ देते हैं और कभी अलग नहीं होते।

सांड का सामना करते समय भी वे मिलकर योजना बनाते हैं और साथ लड़ते हैं। जब होजखास में मोती को भागने का अवसर मिलता है, तब भी वह हीरा को अकेला छोड़कर नहीं जाता। इससे उनकी सच्ची मित्रता, आपसी विश्वास और सहयोग की भावना स्पष्ट होती है।

इसलिए उनका संबंध प्रतिस्पर्धा, घमंड या केवल विद्रोह पर आधारित नहीं है, बल्कि साथ निभाने, विश्वास और सहयोग पर आधारित है।

2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?

(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।

(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।

(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।

उत्तर:

(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

हीरा और मोती अपने पुराने मालिक झूरी से बहुत प्रेम करते थे। वे उसके घर को अपना घर और परिवार मानते थे। जब उन्हें नए स्थान पर भेजा गया, तो उन्हें लगा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया या त्याग दिया है।

इस बात से उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँची। उनका दुख केवल भोजन, रस्सी या नए स्थान से जुड़ा नहीं था, बल्कि उनके मन में अपने मालिक के प्रति गहरा लगाव था। इसी कारण उन्होंने नया स्थान स्वीकार नहीं किया और बार-बार अपने पुराने घर लौटने की कोशिश की।

3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?

(क) कष्टों से बचने के लिए

(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए

(ग) अभिमान की रक्षा के लिए

(घ) अपनापन पाने के लिए

उत्तर:

(घ) अपनापन पाने के लिए

हीरा और मोती केवल कष्टों से बचने के लिए रस्सी तोड़कर नहीं भागे थे। उनका मुख्य उद्देश्य अपने पुराने घर और पुराने मालिक झूरी के पास लौटना था, जहाँ उन्हें प्रेम, सम्मान और अपनापन मिलता था।

नए स्थान पर उन्हें कठोर व्यवहार और उपेक्षा सहनी पड़ी, जिससे वे दुखी हो गए। इसलिए उन्होंने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय लिया, ताकि वे फिर से उसी अपनापन और स्नेह को पा सकें।

4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का घोतक है?

(क) स्वाभिमान

(ख) अहिंसा

(ग) पराधीनता

(घ) अन्याय की रक्षा

उत्तर:

(क) स्वाभिमान

गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश उसके स्वाभिमान को प्रकट करता है। मोती अन्याय और अपमान को चुपचाप सहन करने वाला नहीं है।

जब उसे बिना कारण पीटा जाता है, तो वह अपनी गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिक्रिया करता है। यदि वह पराधीनता स्वीकार करने वाला होता, तो वह सब कुछ चुपचाप सह लेता। उसका आक्रोश बताता है कि उसके भीतर आत्मसम्मान और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की भावना है।

5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?

(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए

(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए

(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए

उत्तर:

(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

कहानी में हीरा और मोती बिना बोले ही एक-दूसरे की भावनाएँ समझ लेते हैं। लेखक ने इसे ही ‘मूक-भाषा’ के रूप में प्रस्तुत किया है।

इस प्रयोग के माध्यम से लेखक यह दिखाना चाहते हैं कि पशुओं में भी संवेदनाएँ, समझ, प्रेम और भावनाएँ होती हैं। हीरा और मोती की मित्रता, निष्ठा, सहयोग और स्वाभिमान उनके भीतर मनुष्य जैसी चेतना को प्रकट करते हैं।

6. “दो बैलों की कथा” को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?

(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के

(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के

(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के

(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

उत्तर:

(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

“दो बैलों की कथा” में हीरा और मोती बार-बार बंधन तोड़कर स्वतंत्र होने का प्रयास करते हैं। इसे स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़कर देखें, तो वे भारतीय जनता के संघर्ष का प्रतीक लगते हैं।

वे अत्याचार सहते हैं, लेकिन हार नहीं मानते। उनका अपने घर लौटने का प्रयास स्वतंत्रता, स्वाभिमान और अधिकारों की चाह को दर्शाता है। इसलिए हीरा और मोती को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाली भारतीय जनता का प्रतीक माना जा सकता है।

पेज 17 – मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?

उत्तर: जब हीरा और मोती नए मालिक गया के घर पहुँचे, तो उन्होंने काम करने से इनकार कर दिया क्योंकि वे अपने पुराने मालिक झूरी से बहुत प्रेम करते थे। झूरी उन्हें केवल पशु नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह मानता था। वहाँ उन्हें प्रेम, सम्मान और अपनापन मिलता था।

नए स्थान पर गया ने उनके साथ कठोर व्यवहार किया। उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिला और डंडे से भी मारा गया। इससे उनके मन में दुख और अपमान की भावना पैदा हुई। उन्हें लगा कि उन्हें जबरदस्ती ऐसे स्थान पर लाया गया है जहाँ उन्हें कोई अपनापन नहीं मिलता।

इसीलिए उन्होंने अपने आत्मसम्मान और झूरी के घर के प्रति लगाव के कारण विरोध किया और काम न करने का निश्चय किया।

2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है कैसे? (संकेत—वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)

उत्तर: बैलों का घर लौट आना साधारण घटना नहीं थी, क्योंकि यह उनके प्रेम, निष्ठा और अपनापन की भावना को दिखाता है। हीरा और मोती नए स्थान पर उपेक्षा और कठोर व्यवहार सह रहे थे। इसलिए वे अपने पुराने मालिक झूरी के पास लौट आए, जहाँ उन्हें प्यार, सम्मान और घर जैसा वातावरण मिलता था।

उनके मन में झूरी के घर की याद, सुरक्षा और स्नेह की भावना रही होगी। दूसरी ओर, झूरी के मन में भी अपने बैलों के लिए प्रेम, चिंता और लगाव था। जब वे वापस आए होंगे, तो झूरी बहुत भावुक हुआ होगा।

यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि पशुओं में भी संवेदनाएँ, समझ और भावनात्मक लगाव होता है। वास्तविक जीवन में भी कई बार जानवर अपने मालिक और घर के प्रति गहरा प्रेम दिखाते हैं।

3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” “कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है” इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।

उत्तर: कहानी में कई घटनाएँ यह सिद्ध करती हैं कि कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है। जब गया हीरा और मोती के साथ कठोर व्यवहार करता है और उन्हें डंडे से मारता है, तब मोती की सहनशीलता समाप्त हो जाती है। वह मूक-भाषा में कहता है— “अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” यह दिखाता है कि अन्याय को हमेशा चुपचाप सहना सही नहीं है।

इसी प्रकार, जब एक शक्तिशाली सांड उन पर हमला करता है, तो दोनों बैल मिलकर उसका सामना करते हैं। वे डरकर भागते नहीं, बल्कि अपनी रक्षा के लिए साहस दिखाते हैं। होजखास में भी वे दीवार तोड़कर अन्य पशुओं को मुक्त करने में सहायता करते हैं।

इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अत्याचार, भय और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करना आवश्यक है। संघर्ष के द्वारा ही सम्मान, स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा की जा सकती है।

4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया….” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।

उत्तर: हीरा और मोती स्वतंत्रता और अपनापन दोनों भावनाओं से प्रेरित थे, लेकिन उनमें अपनापन की भावना अधिक प्रबल थी। जब वे बंधन से मुक्त होते हैं और आजादी का अनुभव करते हैं, तब भी उनका अंतिम उद्देश्य अपने पुराने मालिक झूरी के घर लौटना ही रहता है।

यदि वे केवल स्वतंत्रता चाहते, तो वे कहीं भी स्वतंत्र रह सकते थे। लेकिन वे बार-बार उसी घर लौटने का प्रयास करते हैं जहाँ उन्हें प्रेम, सम्मान और परिवार जैसा स्नेह मिलता था। इससे स्पष्ट होता है कि उनके लिए केवल बंधन से मुक्त होना पर्याप्त नहीं था।

उनके लिए झूरी का घर ही सच्चा आश्रय था। इसलिए कहा जा सकता है कि हीरा और मोती के व्यवहार के पीछे अपनापन और भावनात्मक लगाव सबसे बड़ी प्रेरणा थी।

5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी”, “अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है”- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ कि “अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है।” यदि कोई व्यक्ति या प्राणी अन्याय को चुपचाप सहता रहता है, तो अत्याचारी का साहस और बढ़ जाता है।

कहानी में हीरा और मोती गया के अत्याचार को बहुत देर तक सहन नहीं करते। वे काम करने से इनकार करके अपना विरोध प्रकट करते हैं। यह उनका आत्मसम्मान और अन्याय के विरुद्ध साहस दिखाता है। यदि वे चुपचाप सब सहते रहते, तो गया का कठोर व्यवहार और बढ़ सकता था।

होजखास में भी वे केवल अपनी मुक्ति के बारे में नहीं सोचते, बल्कि दीवार तोड़कर अन्य पशुओं को भी स्वतंत्र होने का अवसर देते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना आवश्यक है। तभी सम्मान, न्याय और स्वतंत्रता की रक्षा हो सकती है।

6. “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अच्छे मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।

उत्तर: हीरा और मोती के बीच गहरा भाईचारा और सच्ची मित्रता थी। यह बात कहानी की कई घटनाओं से सिद्ध होती है।

पहला, दोनों हमेशा साथ-साथ रहते और काम करते थे। वे बिना बोले ही एक-दूसरे की भावनाएँ समझ लेते थे। दूसरा, जब शक्तिशाली सांड ने उन पर हमला किया, तो दोनों ने मिलकर उसका सामना किया। इससे उनकी एकता, साहस और सहयोग स्पष्ट होता है।

तीसरा, होजखास में जब मोती के पास भागने का अवसर था, तब भी उसने हीरा को अकेला छोड़कर जाने से इनकार कर दिया। चौथा, कठिन परिस्थितियों में भी दोनों ने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा और अंत में साथ ही अपने घर लौटे। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि हीरा और मोती केवल साथी बैल नहीं थे, बल्कि सच्चे मित्र और भाई जैसे थे।

7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।

उत्तर: कहानी में मालकिन और छोटी लड़की के व्यवहार में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। मालकिन का व्यवहार शुरू में हीरा और मोती के प्रति कठोर और उदासीन था। उसने क्रोध में आकर उन्हें मायके भेज दिया और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश नहीं की।

लेकिन जब हीरा और मोती कई कष्ट सहकर वापस लौटते हैं, तो मालकिन का हृदय बदल जाता है। वह उनके माथे चूमकर अपना स्नेह प्रकट करती है। इससे पता चलता है कि अंत में उसे भी उनके प्रति प्रेम और अपनापन महसूस होता है।

इसके विपरीत, छोटी लड़की शुरू से ही दयालु, संवेदनशील और करुणामयी थी। वह बैलों की पीड़ा को समझती थी, उन्हें चोरी-छिपे रोटियाँ खिलाती थी और उनकी रस्सी खोलकर उन्हें भागने में सहायता करती थी।

इस प्रकार, छोटी लड़की का व्यवहार आरंभ से ही प्रेमपूर्ण और दयालु था, जबकि मालकिन का व्यवहार बाद में बदलकर स्नेहपूर्ण हो गया।

पेज 18 के प्रश्न उत्तर

मेरी कल्पना में अनुमान

1. “उसने उनके माथे सहलाए और बोली— खोल देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?

उत्तर: यदि मैं वह छोटी लड़की होता/होती, तो मैं हीरा और मोती की मदद प्रेम, समझदारी और सावधानी से करता/करती। सबसे पहले मैं उन्हें चुपके से भोजन और पानी देता/देती, ताकि वे कमजोर न पड़ें। इसके बाद सही समय देखकर उनकी रस्सियाँ खोल देता/देती, जिससे वे बिना किसी डर के वहाँ से निकल सकें।

मैं उन्हें ऐसे रास्ते की ओर जाने में मदद करता/करती, जहाँ से वे सुरक्षित रूप से अपने पुराने घर की दिशा में जा सकें। साथ ही, मैं इस बात का ध्यान रखता/रखती कि किसी को उनकी मदद करने का संदेह न हो। इस प्रकार मैं उनकी स्वतंत्रता और सुरक्षा दोनों का ध्यान रखते हुए उनकी सहायता करता/करती।

2. “दोनों गधे अभी तक क्यों-के-क्यों खड़े थे” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।

उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ कि भय और संकोच कई बार इंसान को अवसर मिलने पर भी आगे बढ़ने से रोक देते हैं। कहानी में होजखास के गधे इसका अच्छा उदाहरण हैं। जब हीरा और मोती ने दीवार तोड़कर सबको आज़ाद होने का अवसर दिया, तब भी दोनों गधे डर और संकोच के कारण वहीं खड़े रहे। उनके सामने स्वतंत्र होने का मौका था, लेकिन भय ने उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया।

ऐसी स्थिति वास्तविक जीवन में भी देखने को मिलती है। कई बार विद्यार्थी उत्तर जानते हुए भी डर या झिझक के कारण कक्षा में हाथ नहीं उठाते। कुछ लोग सही बात जानते हुए भी बोलने से डरते हैं। इस कारण वे अच्छे अवसर खो देते हैं।

इसलिए हमें डर और संकोच पर नियंत्रण रखना चाहिए। सही अवसर मिलने पर समझदारी और साहस के साथ निर्णय लेना चाहिए, तभी हम जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।

पेज 18 के अन्य प्रश्न उत्तर

मेरे अनुभव में विचार

1. “दोस्ती में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।

उत्तर: मैं इस बात से कुछ हद तक सहमत हूँ। जब दोस्ती गहरी हो जाती है, तो दोस्तों के बीच झिझक कम हो जाती है। वे एक-दूसरे से खुलकर बात करते हैं, मज़ाक करते हैं और कभी-कभी हल्की-फुल्की नोकझोंक भी कर लेते हैं। इससे उनके बीच अपनापन और विश्वास दिखाई देता है।

लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर सच्ची दोस्ती में धौल-धप्पा या ज्यादा मज़ाक ही हो। कुछ दोस्त शांत स्वभाव के होते हैं और फिर भी उनकी दोस्ती बहुत मजबूत होती है। मेरे अनुभव में, मेरे दोस्तों के साथ हँसी-मज़ाक होता है, लेकिन हम एक-दूसरे की भावनाओं और सम्मान का भी ध्यान रखते हैं। इसलिए मेरे अनुसार सच्ची दोस्ती का आधार विश्वास, समझ और साथ निभाना है, केवल मज़ाक या धौल-धप्पा नहीं।

2. “हीरा ने तिरस्कार किया— गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए”, “यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं – हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?

उत्तर: इस प्रसंग में मैं हीरा के विचार से अधिक सहमत हूँ। हीरा का कहना है कि गिरे हुए शत्रु पर वार नहीं करना चाहिए। यह उसकी दयालुता, नैतिकता और संयम को दिखाता है। वह जीत के बाद भी क्रूरता नहीं दिखाना चाहता।

मोती का विचार क्रोध और बदले की भावना से भरा हुआ है। अन्याय सहने के बाद उसका गुस्सा स्वाभाविक है, लेकिन गिरे हुए शत्रु पर वार करना उचित नहीं माना जा सकता। मेरे विचार से सच्ची वीरता वही है, जिसमें व्यक्ति शक्ति होने पर भी संयम रखे। इसलिए मैं हीरा के पक्ष में हूँ, क्योंकि उसका विचार अधिक मानवीय, संतुलित और प्रेरणादायक है।

3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।

उत्तर: हाँ, मैंने एक बार अपने मित्र के साथ मिलकर एक कठिन परिस्थिति का सामना किया था। परीक्षा के कुछ दिन पहले मेरे मित्र की तबीयत खराब हो गई थी, इसलिए वह ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहा था। उस समय मैंने उसकी मदद करने का निश्चय किया।

मैंने उसे अपने नोट्स दिए और रोज़ थोड़ा-थोड़ा पाठ समझाया। हमने मिलकर महत्वपूर्ण प्रश्नों की तैयारी की और कठिन विषयों को दोहराया। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा और वह परीक्षा में अच्छे से लिख पाया। इस घटना से मुझे यह सीख मिली कि सच्चा मित्र वही होता है, जो मुश्किल समय में साथ दे। विपत्ति में साथ निभाना ही सच्ची मित्रता की पहचान है।

कक्षा 9 हिंदी पाठ्यपुस्तक गंगा अध्याय 1 के कठिन शब्दार्थ

शब्दअर्थ
निरापदआपत्ति से रहित, सुरक्षित
सहिष्णुतासहनशीलता, क्षमा
विषादउदासी, अवसाद, मन उचट जाना
पराकाष्ठाअंतिम सीमा, चरम कोटि
कदाचित्कभी, शायद
पछाईंपश्चिमी प्रदेश का, पश्चिम दिशा
चौकसचौकन्ना, सावधान, ठीक
विग्रहअलगाना, फैलाना, खंड
विनोदपरिहास, मनोरंजन, क्रीड़ा
आत्मीयताअपनापन, मैत्री
नाँदमिट्टी का बड़ा और चौड़ा बर्तन जिसमें पशुओं को चारा-पानी दिया जाता है
पगहियाढोर (पशु) बाँधने की रस्सी
गराँवफंदेदार रस्सी जो बैल आदि के गले में पहनाई जाती है
कनखियोंआँख की कोर, तिरछी निगाह से देखना
चरनीमेंड़दार लंबा चबूतरा जिस पर गाय-बैल को चारा-पानी दिया जाता है
प्रतिवादविरोध, खंडन
ताकीदकिसी कार्य के लिए बार-बार चेतावने की क्रिया
टिटकार‘टिक-टिक’ शब्द करके घोड़े, बैल आदि को चलाने के लिए प्रेरित करना
तेवरक्रोधभरी दृष्टि, कोप प्रकट करने वाली तिरछी नजर
काँजीहौसवह बाड़ा जिसमें दूसरे का खेत आदि खाने वाले आवारा पशु बंद किए जाते हैं
मल्लयुद्धकुश्ती, बाहुयुद्ध
व्याकुलघबराया हुआ, हतबुद्धि, भीत
रगेदनाभगाना, खदेड़ना, दौड़ाना
तजुरबाअनुभव
बेतहाशाबहुत तेजी से, बिना सोचे-विचारे
उजड्डपनअशिष्टता, उद्दंडता
नीलामबिक्री की वह रीति जिसमें सबसे अधिक दाम बोलने वाले के हाथ माल बेचा जाता है
अख्तियारपसंद करने का अधिकार, वश, विचाराधिकार

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FAQs on Class 9 Hindi Ganga Chapter 1 Question Answer

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